ali imam-e-man-ast-o-manam ghulam-e-’ali

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ali imam-e-man-ast-o-manam ghulam-e-’ali

अली इमाम मन अस्त ओ गुलाम-ए-अली
हज़ार जान-ए-गिरामी फ़िदा बा नाम-ए-अली

अली अली अली सुबह शाम होना चाहिदा
जब जान तन से निकले लब पर यही हो

अली अली अली सुबह शाम होना चाहिदा
अली दे मलंगन विच नाम होना चाहिदा

अली नाम दा हाथ विच फड़ तूथा
तैनू तोढ़ पई आवे तां मैं झूठा

अली अली अली हैदर मौला
अली दे देवानेया ने डर के नहीं रहना ए
हर दम अली अली अली कहना ए

ओहदा आप अली निगाहबान हुंदा
जिंद अली दे नाम जो करी जावे
दम अली अली हर दम अली अली तू करी जावो
कोई सर्हदा ए ते सरही जावे

वो अली जो पर्दा-ए-कौसर का हमराज था
वो अली जिसपे मुहम्मद मुस्तफा को नाज़ था
वो अली जिसने गदाओं को सुलेमान कर दिया
वो अली जिसने अल्लाह का घर मुसलमान कर दिया

ऐ मुन्कर-ए-हैदर तुझे हैदर न मिलेगा
महशर में शफ़ाअत को पैग़ामबर न मिलेगा
अली इल्म का दर है तो नबी इल्म का घर है

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